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अग्न्याशय – शरीर में कार्य और उसकी बीमारियां

कार्य

अग्न्याशय के शरीर में दो मुख्य कार्य होते हैं|

पहला है एंजाइम का उत्पादन जो पाचनक्रिया में मदद करता है| यह एंजाइम खोराक से पोषण प्राप्त होता है| यह एंजाइम खोराक के संपर्क में आने के बाद ही सक्रिय होते हैं| खोराक में से चर्बी के पाचन के लिए यह सबसे ज़रूरी है|

दूसरा काम है इन्सुलिन बनाके शरीर में ग्लूकोस की मात्रा का नियंत्रण करना|

अग्न्याशय की बीमारियां

एक्यूट (अचानक प्रकट होने वाला) पैंक्रीयटाइटीस (अग्न्याशय में सूजन)

अग्न्याशय में घाव होने से उसके शक्तिशाली एन्ज़इम्स योग्य स्थल पहुंचने से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं| यह एन्ज़इम्स स्वयं अग्न्याशय का पाचन शुरू कर देता है और रक्त के द्वारा शरीर के और अंग को भी नुकसान पहुंचता है| अग्न्याशय में सूजन हो जाने से पेट में पानी जैसे मैल जमा होता है| यह मेडिकल इमरजेंसी होती है| इस बीमारी में अचानक पेट में तीव्र दर्द होता है और साथ में उल्टियां भी होती है| सामान्य केस में कुछ दिनों में तबियत सुधर जाती है लेकिन गंभीर केस में जान का जोखम भी हो सकता है| अग्न्याशय में ऐसे घाव होने के अनेक कारन होते हैं जैसे की शराब, पित्त की नली में पथ्थर, दवाई का साइड इफ़ेक्ट, पेट में मार लगना, अग्न्याशय  में चेप लगना, ट्राइग्लिसराइड इस कैल्शियम की मात्रा अधिक होना, और इतियादी|

क्रोनिक (जीर्ण) पैंक्रीयटाइटीस (अग्न्याशय सुख जाना)

लम्बे समय से अग्न्याशय में हानि होने का यह नतीजा होता है| इसमें अग्न्याशय की कार्यशीलता काम  हो जाती है| पाचनक्रिया में कमी होने की वजह से चर्बी और खोराक का पाचन रुक जाता है| इसकी वजह से मल में तेल की बूँदें दिखती है, जिसको ‘स्टीयटोरिया’ बोलते हैं| वजन में घटाव होना और खाने के बाद पेट में दर्द होना भी इसके लक्षण हैं| इन्सुलिन कम बनने से डायबिटीज हो सकता है| इस बीमारी में अग्न्याशय में पथरियां भी बन जाती है| यह बीमारी का कारन हैं शराब, तमाकू, बीड़ी, अनुवांशिक बीमारियां, और इतियादी| इसके इलाज में एंजाइम की दवाई दी जाती है| कुछ दर्दी को ऑपरेशन की ज़रुरत भी हो सकती है|

अग्न्याशय में गाँठ

अग्न्याशय में दो प्रकार की गाँठ होती है – १) कैंसर की और २)सादी 

कैंसर की गाँठ के लक्षण होते हैं वजन घटना, पेट में दर्द, पीलिया, खुजली, और उलटी| इसका निदान सिटी स्कैन या MRI से हो सकता है| पक्का निदान करने के लिए दूरबीन के द्वारा सोनोग्राफी करके एक नमूना लिया जाता है| इलाज मैं ऑपरेशन, कीमो या दोनों पद्धति की मिश्रण होता है| 

अग्न्याशय की सादी गाँठ निकलने की ज़रुरत अक्सर नहीं होती| पर समय पे उसका परिक्षण करते रहना चाहिए|

कार्य

अग्न्याशय के शरीर में दो मुख्य कार्य होते हैं|

पहला है एंजाइम का उत्पादन जो पाचनक्रिया में मदद करता है| यह एंजाइम खोराक से पोषण प्राप्त होता है| यह एंजाइम खोराक के संपर्क में आने के बाद ही सक्रिय होते हैं| खोराक में से चर्बी के पाचन के लिए यह सबसे ज़रूरी है|

दूसरा काम है इन्सुलिन बनाके शरीर में ग्लूकोस की मात्रा का नियंत्रण करना|

अग्न्याशय की बीमारियां

एक्यूट (अचानक प्रकट होने वाला) पैंक्रीयटाइटीस (अग्न्याशय में सूजन)

अग्न्याशय में घाव होने से उसके शक्तिशाली एन्ज़इम्स योग्य स्थल पहुंचने से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं| यह एन्ज़इम्स स्वयं अग्न्याशय का पाचन शुरू कर देता है और रक्त के द्वारा शरीर के और अंग को भी नुकसान पहुंचता है| अग्न्याशय में सूजन हो जाने से पेट में पानी जैसे मैल जमा होता है| यह मेडिकल इमरजेंसी होती है| इस बीमारी में अचानक पेट में तीव्र दर्द होता है और साथ में उल्टियां भी होती है| सामान्य केस में कुछ दिनों में तबियत सुधर जाती है लेकिन गंभीर केस में जान का जोखम भी हो सकता है| अग्न्याशय में ऐसे घाव होने के अनेक कारन होते हैं जैसे की शराब, पित्त की नली में पथ्थर, दवाई का साइड इफ़ेक्ट, पेट में मार लगना, अग्न्याशय  में चेप लगना, ट्राइग्लिसराइड इस कैल्शियम की मात्रा अधिक होना, और इतियादी|

क्रोनिक (जीर्ण) पैंक्रीयटाइटीस (अग्न्याशय सुख जाना)

लम्बे समय से अग्न्याशय में हानि होने का यह नतीजा होता है| इसमें अग्न्याशय की कार्यशीलता काम  हो जाती है| पाचनक्रिया में कमी होने की वजह से चर्बी और खोराक का पाचन रुक जाता है| इसकी वजह से मल में तेल की बूँदें दिखती है, जिसको ‘स्टीयटोरिया’ बोलते हैं| वजन में घटाव होना और खाने के बाद पेट में दर्द होना भी इसके लक्षण हैं| इन्सुलिन कम बनने से डायबिटीज हो सकता है| इस बीमारी में अग्न्याशय में पथरियां भी बन जाती है| यह बीमारी का कारन हैं शराब, तमाकू, बीड़ी, अनुवांशिक बीमारियां, और इतियादी| इसके इलाज में एंजाइम की दवाई दी जाती है| कुछ दर्दी को ऑपरेशन की ज़रुरत भी हो सकती है|

अग्न्याशय में गाँठ

अग्न्याशय में दो प्रकार की गाँठ होती है – १) कैंसर की और २)सादी 

कैंसर की गाँठ के लक्षण होते हैं वजन घटना, पेट में दर्द, पीलिया, खुजली, और उलटी| इसका निदान सिटी स्कैन या MRI से हो सकता है| पक्का निदान करने के लिए दूरबीन के द्वारा सोनोग्राफी करके एक नमूना लिया जाता है| इलाज मैं ऑपरेशन, कीमो या दोनों पद्धति की मिश्रण होता है| 

अग्न्याशय की सादी गाँठ निकलने की ज़रुरत अक्सर नहीं होती| पर समय पे उसका परिक्षण करते रहना चाहिए|

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