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पित्ताशय

पित्ताशय – यह एक पित्त से भरी थैली है जो लिवर के नीचे स्तिथ है| इसमें पित्त जमा रहता है और खाने बे बाद यह पित्त को आंत मैं भेजता है जो पाचन मैं मदद करता है|

पित्ताशय की बीमारियां

पित्ताशय की पथरियां

पित्ताशय में पथरी बनने की सम्भावना सबसे ज़्यादा होती है महिलाओ में, मोटापे में, सुस्त जीवनशैली, गर्भावस्था, खून की बीमारियां, डायबिटीज, अधिक चर्बी वाला खोराक, कुछ दवाइओ का आड़ असर या फिर अनुवांशिक भी हो सकता है|

ज़्यादातर पथरियां कोलेस्ट्रॉल से बानी होती है| किडनी की पथरी से यह इस तरह अलग होती है| पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने की वजह से कोलेस्ट्रॉल अलग होके गुच्छन होके छोटी पथरी बन जाती है| यह छोटी पथरियां धीरे-धीरे विस्तार में बड़ी होती जाती है|

भारत में ६% लोगों को पित्त की थैली में पथरी होती है| ज़्यादातर दर्दियों में कोई लक्षण नहीं आते हैं और इलाज की ज़रुरत नहीं होती है|

जब लक्षण होते हैं, तब पेट दर्द होता है| यह पेट दर्द अचानक चालू हो सकता है और तेजी से बढ़ता है| कभी उलटी भी हो सकती है| कुछ दर्दियों को पीलिया भी होता है| यह लक्षण होते हैं पित्ताशय की थैली में सूजन (cholecystitis) की वजह से या फिर पथरी की पित्त की नली में अटकने से| अग्न्याशय की नाली पे पथरी अटकने से pancreatitis (अग्न्याशय में सूजन) हो सकता है|

जिन दर्दियों को ज़्यादा तकलीफ हो या जटिल समस्या हो उनको ऑपरेशन की ज़रुरत लगती है| यह दूरबीन के द्वारा (छोटे छेद से) या पेट खोल के किया जाता है| अगर पथरी पित्त की नाली में फंस गयी है तोह ERCP से निकलना पड़ता है|

पित्ताशय ज़िन्दगी के लिए ज़रूरी नहीं है| उसको निकलने पर बड़ी आफत नहीं आती है| पित्ताशय निकलने के बाद कुछ दर्दियों को एसिडिटी, गैस या दस्त की तकलीफ हो सकती है|

पित्ताशय का कैंसर (कर्क रोग)

यह प्रकार का कैंसर उत्तर भारत में ज़्यादा होता है, खास कर के यू.पी. में| इसके लक्षण में पीलिया, पेट दर्द और वजन घटाव होते हैं| इलाज में ऑपरेशन या कीमो लगता है|

पित्ताशय में छोटी गाँठ (polyp)

यह गांठें पित्ताशय की अंदरूनी परत से उत्पन होती है| यह सोनोग्राफी से पकड़ में आती है| छोटी गांठों (<५ mm) का इलाज करने की ज़रुरत नहीं होती, सिर्फ निगरानी रखनी होती है| अगर बड़ी है, तोह आगे जांच करनी पड़ती है|

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